देहरादून दोग्रास के लिये इम्पोर्तंत जगह है - -इसको को कोई डोगरा अपने सपने में भी नहीं भूल सकता - --
इसीलिए दोग्रास के ४० साल देहरादून में मनाये जायेंगे --
देहरादून हरा भरा है-चरों और पेढ़ पौधे और जंगलात हैं-
देहरादून का मौसम बहुत लाजवाब है --
देहरादून जैसा शहर तो कोई हो ही नहीं सकता--
लोग अपनी जान देने को तैयार थे-
जीपी जबलपुर चोढ़ कर देहरादून के चक्कर में आ गए--
एक अनार सौ बीमार--रमाकांत-संजीव पाहवा--प्रेम कुमार --रमेश वर्मा-जीपी नामदेव -
बस लहू लुहान नहीं हुए ---बाकी सब कुछ हुआ और केवल सपनों में---
सब अपनी अपनी शादी करा कर बच्चे पैदा कर --वृद्ध अवस्था में आ गए लेकिन देहरादून का ख्याल अब तक सपनों में परेशां करता है--
क्या किया जाए?---यह तो इन आशिकों के मरने से ही ख़तम होगा --
जब तक सूरज चाँद रहेगा ---मम्-- तेरा नाम रहेगा---
नमस्कार --नमस्कार--नमस्कार--
डोगरा क्लब जिंदाबाद !!!!!
Thursday, 25 September 2008
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