Thursday, 25 September 2008

देहरादून की खासियतें

देहरादून दोग्रास के लिये इम्पोर्तंत जगह है - -इसको को कोई डोगरा अपने सपने में भी नहीं भूल सकता - --
इसीलिए दोग्रास के ४० साल देहरादून में मनाये जायेंगे --

देहरादून हरा भरा है-चरों और पेढ़ पौधे और जंगलात हैं-

देहरादून का मौसम बहुत लाजवाब है --

देहरादून जैसा शहर तो कोई हो ही नहीं सकता--

लोग अपनी जान देने को तैयार थे-

जीपी जबलपुर चोढ़ कर देहरादून के चक्कर में आ गए--

एक अनार सौ बीमार--रमाकांत-संजीव पाहवा--प्रेम कुमार --रमेश वर्मा-जीपी नामदेव -

बस लहू लुहान नहीं हुए ---बाकी सब कुछ हुआ और केवल सपनों में---

सब अपनी अपनी शादी करा कर बच्चे पैदा कर --वृद्ध अवस्था में आ गए लेकिन देहरादून का ख्याल अब तक सपनों में परेशां करता है--

क्या किया जाए?---यह तो इन आशिकों के मरने से ही ख़तम होगा --

जब तक सूरज चाँद रहेगा ---मम्-- तेरा नाम रहेगा---

नमस्कार --नमस्कार--नमस्कार--

डोगरा क्लब जिंदाबाद !!!!!

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